गंगोत्री धाम से गंगा डोली की विदाई की तैयारी में उमड़ा उत्सव।
आज गंगोत्री धाम से वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रिति-रिवाजों के साथ मां गंगा की डोली मुखवा गांव के लिए विधि-विधान से प्रस्थान हुआ। आज अन्नपूर्णा मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद कल सुबह मार्कण्डेय मंदिर में अल्प विश्राम के बाद डोली मुखवा गांव पहुंचेगी। शीतकाल में इसी स्थान पर गंगा मैया की पूजा की जाएगी। वहीं कल भैया दूज पर बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली ओंकारेश्वर व यमुनोत्री की डोली खरसाली गांव के लिए प्रस्थान करेगी। बदरी धाम के कपाट 25 नवंबर को बंद होंगे।
आज गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए विधि-विधान के साथ अन्नकूट पर्व पर पूर्वाहन 11 बजकर 36 मिनिट पर शीतकाल के बंद कर दिए गएं। कपाट बंद होने पर गंगोत्री धाम से गंगा जी की उत्सव मूर्ति डोली में बिठाकर मुखवा गांव के लिए प्रस्थान किया। जहाँ गंगा जी की उत्सव प्रतिमा गंगा मंदिर में शीतकाल में विराजमान रहेंगी। इससे पूर्व आज मां गंगा की विग्रह डोली मुखबा से तीन किमी पहले मार्केण्डेय के अन्नपूर्णा मंदिर में रात्री विश्राम करेगी। शीतकाल में मुखवा के गंगा मंदिर में दर्शन-पूजन किए जा सकेंगे।
यमुनोत्री धाम के कपाट भी भैया दूज यानी कल 23 अक्टूबर अपराह्न 12ः30 बजे बंद किए जाएंगे। शीतकाल में यमुना जी की उत्सव मूर्ति खरसाली गांव स्थित यमुना मंदिर में विराजमान रहेंगी। जहां शीतकाल के दौरान श्रद्धालुजन यमुना जी के दर्शन व पूजा-अर्चना कर सकेंगे। मुखवा और खरसाली स्थित मंदिरों को भी सजाया-संवारा गया है। भैयादूज पर ही बाबा केदारनाथ के कपाट भी बंद किए जाएंगे और बाबा शीतकाल में ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन देंगे।
