सरयू नदी पर 113 साल पुराना जर्जर पुल
राज्य प्रवक्ता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहाड़ी जिलों को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने की कवायद शुरू कर दी है। पहले चरण में उन्होंने नगर निगम पिथौरागढ़, नगर पालिका परिषद बाड़ाहाट (उत्तरकाशी) व नगर पंचायत गैरसैंण (ग्रीष्मकालीन राजधानी) को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए अनुमोदन दिया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने दी विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 39.68 करोड की धनराशि स्वीकृत की है।
आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास की कई अहम योजनाओं को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने शहरी विकास विभाग के अन्तर्गत 17 नगर निकायों में देवभूमि रजत जयंती पार्क के निर्माण के 13.46 करोड, जनपद देहरादून की उत्तर शाखा के अन्तर्गत गंगोत्री विहार में नलकूप खनन, राईजिग-मेन व तत्संबंधी कार्यों के निर्माण के लिए 2.22 करोड की धनराशि को मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री ने पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर एसएएससीआई के अन्तर्गत प्रस्तावित जोन प्रथम शिवालिक नगर पम्पिंग जलापूर्ति योजना का पुनर्गठन योजना के तहत 6.81 करोड की योजना की योजना की स्वीकृति, अमृत 2.0 स्टेट वाटर एक्शन प्लान-2 के अन्तर्गत 05 योजनाओं के लिए 3.25 करोड रुपये मंजूर किए हैं। जनपद देहरादून की केन्द्रीय भण्डार शाखा के अन्तर्गत नगरीय पेयजल योजनओं के अघरेलू जल संयोजनों पर एएमआर वाटर मीटर अधिष्ठापन के कार्यों के लिए 10 करोड के साथ ही मुख्यमंत्री घोषणा के अन्तर्गत जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत मे बनबसा के ग्रामीण क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग की आन्तरिक 10 किमी सड़कों के सुधारीकरण कार्य के लिए 3.94 करोड रुपये स्वीकृत किए हैं।
सरयू नदी पर 113 साल पुराने पुल के पुनर्निर्माण को मंजूरी
राज्य सरकार ने बागेश्वर जिले में सरयू नदी पर बने 113 वर्ष पुराने झूला पुल के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए 1.8 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। यह कार्य दिसंबर माह से शुरू होगा और इसे नौ माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह ऐतिहासिक पुल पिछले दो वर्षों से बंद है, क्योंकि पुल की दीवारों और गर्डरों में दरारें आ गई थीं। सुरक्षा कारणों के चलते जिला प्रशासन ने इस पुल पर आवाजाही रोक दी थी और वहां बैरिकेड्स लगाकर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया था। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने बताया कि शासन की स्वीकृति मिलने के बाद दिसंबर से पुल के पुनर्निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
1913 में बनाया गया था पुल
यह पैदल झूला पुल 1913 में बनाया गया, जो शहर के बाजारों और नदी पार के बस्तियों को जोड़ने का प्रमुख साधन रहा है। यह पुल वर्षों से बागेश्वर की पहचान बन चुका है और स्थानीय लोगों की अनेक पीढ़ियों ने इसका उपयोग किया है। व्यापार मंडल अध्यक्ष सूरज जोशी ने कहा कि, सरकार की मंजूरी के बाद इस ऐतिहासिक पुल को नया जीवन मिलने जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को राहत मिलेगी।
