प्रतीकात्मक चित्र
राज्य प्रवक्ता
उत्तराखंड में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही है। गरीब, दलित व बीमार लोगों को चुगुल में फंसाने के साथ ही ईसाई बाहुल्य क्षेत्रों में रह रहे परिवारों को लगातार परेशान किया जाता है, परिवारों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के लिए उन्हें लगातार परेशान किया जाता है।
देहरादून के नेहरूग्राम, जोगीवाला, मोहकमपुर, रायपुर आदि क्षेत्रों में मिशनरियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही है। इस मामले में विश्व हिन्दू परिषद लगातार सक्रिय भी है और ऐसे लोगों को चिन्हित किया किया जा रहा है। इस हिन्दू परिवार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि देहरादून के नेहरू ग्राम क्षेत्र में ईसाई परिवारों के बीच रहता है। इस परिवारों को लगातार वहां से भगाने की कोशिशें हर दिन की जाती है। कई मौकों पर ईसाई परिवार अपने घरों में पार्टियां आयोजित करते हैं और रात भर हुड़दंग रहता है।
यहां तक कार्यक्रमों में हिंदू परिवार शामिल होते हैं, जहां उन्हें पहले प्रवचनों में शामिल कर धर्म परिवर्तन के लिए तैयार किया जाता है। प्रक्रिया धीरे-धीरे की जाती है और अंत में उस परिवार को लालच देकर ईसाई धर्म में धर्मांतरण कर दिया जाता है। वह परिवार यह भी बताता है कि ईसाई परिवार उसे गोली मारने तक की धमकी देते हैं और ऐसे में उसका परिवार असुरक्षित है। इस मामले में परिवार को एफआईआर दर्ज करने की सलाह दी गई लेकिन उसने यह कह कर मना कर दिया कि बच्चे छोटे हैं और रास्ता एक ही है। बहरहाल यह स्थिति राजधानी देहरादून दून में है।
बता दें कि साल 2022 में उत्तरकाशी जिले के पुरोला क्षेत्र में क्रिसचन पर सामूहिक धर्मांतरण को लेकर बावल हुआ। तब इस मामले की प्राथमिकी विश्व हिंदू परिषद ने दर्ज करवाई। तहरीर में एक नामजद सहित ईसाई मिशनरी के कुछ लोंगो के खिलाफ पुलिस ने उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2018 के तहत मुकदमा दर्ज किया। तब पुरोला में जुलूस निकालकर कार्रवाई की मांग की गई और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन सौंपा गया।
पुरोला का घटना क्रम बताए तो एक आयोजन किया रहा था, होरमोनियम, ढोल-तलबे की थाप पर पहले ईशू पर आधारित भजन गाए गए। उसके बाद पश्चिम बंगाल के पादरी जो लंबे समय से पुरोला क्षेत्र में सक्रिय थे ने लोगों को भ्रमित करना शुरू किया और यह बताया कि सनातन धर्म में ताकत नहीं है और ईसाई धर्म बहुत ताकतवर है। ईशू प्रार्थना करते ही सब ठीक कर देते हैं। हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा पद्धति पर तंज कसे गए। आयोजन की भनक लगते ही ग्रामीणों और हिंदू संगठनों के लोगों ने मौके पर पहुंचकर हंगामा किया और धर्मांतरण का आरोप लगाया।
हिंदू संगठनों ने सामूहिक धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए पुलिस और प्रशासन से मामले की शिकायत की। तब यह समाचार पत्रों की सुर्खी बना। समाचार पत्रों ने लिखा – ईसाई मिशनरियों के चंगुल में उत्तराखंड। 14 वर्षों से पश्चिम बंगाल के पादरियों के संपर्क में रहने के बाद उत्तराखंड में मतांतरण कर लोगों को ईसाई बनाने की मुहिम। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को दबोच लिया वहीं अमेरिका से आए ईसाई मिशनरी से जुड़े दो लोग भी सामने आए। कुल मिलाकर फंडिंग का खेल और धर्मांतरण को लेकर ईसाई मिशनरी अपनी गतिविधियां लगातार बढ़ा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में धर्मांतरण पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और संबंधित विभाग लगातार इसकी सूचनाएं भी एकत्रित कर रहा है।
उत्तराखंड में मिशनरियों का खेल
खटीमा (उत्तराखंड) राज्य के नेपाल सीमा से लगे खटीमा सितारगंज नानकमत्ता विधानसभा क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों का जाल बिछा हुआ है, ईसाई मिशनरियां न सिर्फ यही बसी महाराणा प्रताप के वंशज मानी जाती थारू बुक्सा जनजाति को ईसाई बना रही है बल्कि सिक्खों और जौनजौनसारी जनजाति में भी कन्वर्जन का काम करने में लगी है।
उत्तराखंड जब यूपी का हिस्सा था तब से लेकर अब तक या कहें आज़ादी के कुछ समय बाद से ही ईसाई मिशनरियों कन्वर्जन का कार्य कर रही है। चिकित्सा और शिक्षा के बहाने सेवा कार्य करने वाले मिशनरियो ने जनजाति क्षेत्रो में अपना काम पहले फैलाया।
खास बात ये कि नेपाल से लगे इस सीमांत राज्य में चर्च और मिशनरियां इसलिए सक्रिय हुई कि ये इलाका अत्यंत ही पिछड़ा हुआ था। थारू बुक्सा जोकि महाराणा वंशज कहलाती है, मुगलो के आतंक से यहां तराई के जंगलों में आकर बसी थी,आज़ादी के बाद इन्हें यहां कानूनी रूप से इन्हें जनजाति का दर्जा दिया गया और इन्हें नौकरियों में आरक्षण जैसी सुविधाएं भी दी गयी।
चर्च ने यहीं से अपना खेल शुरू किया कि सरकारी पदों पर ईसाई कैसे काबिज हो? इसके लिए चर्च मिशनरियो ने यहां मिशनरी कान्वेंट स्कूल खोले और अच्छी शिक्षा के लिए जनजाति के बच्चो और उनके परिवारों को प्रलोभन देकर ईसाई बनने का ताना बाना बुना और तब से ये कन्वर्जन का षड्यंत्र आजतक चला आरहा है।
राणा वशंज, सिखो में राय और मजबी जाति जो कभी कट्टर हिन्दू थे वो भी हिंदू धर्म से ही विमुख होने लगे। विदेशों से मिशनरियो को मिलने वाले सहायता से कन्वर्जन का अभियान बड़े पैमाने पर चलाया गया जो अभी भी चल रहा है।थारू बुक्सा जनजाति की 40 प्रतिशत आबादी चर्च चर्च के चंगुल में फंस कर ईसाई बन चुकी है। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से मिशनरियो के विदेशी मदद पर रोकथाम तो हुई लेकिन चर्च मिशनरी संचालित स्कूलों ने अपने यहां पढ़ने वाले सम्पन्न हिन्दू बच्चों की फीस में वृद्धि करके इस पैसे को कन्वर्जन में लगाने का रास्ता खोज लिया है।
यानि हिन्दू सम्पन्न परिवारों के पैसों से ही अब कन्वर्जन होने लगा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। पांचजन्य समाचार पत्र लगातार इस पर चिंता जाहिर करता है और उसने अपने लेखों में उत्तराखंड के मैदानों से लेकर पहाड़ों तक की गतिविधियों का खाका खींचा है।
